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3 अक्तूबर, 1957 से विविध भारती के स्थापना दिनसे ही रेडियो सुनने की शुरूआत । ८ साल की उम्रसे ।
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मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

आज 16 अप्रैल के दिन भारतिय फिल्म संगीत के एक महान वादक कलाकार और वाद्यवृंद संयोजक श्री एनोक डेनियेल्स को जनम दिन की शुभ:कामनाँ के साथ देख़ें और सुने उनसे सजीव साक्षात्कार

आज भारतीय सिने संगीत के महान वादक कलाकारों और वाद्यवृंद संयोजक और संचालक तथा कुछ रूप से संगीतकार भी वैसे पूना के  श्री एनोक डेनियेल्स साहब का जनम दिन है और अपनी आयु के 80 साल बिता कर 81 वे सालमें प्रवेष कर चूके है, और भगवान की दया से आज भी वे काफ़ी तंदूरस्त है और संगीत की पूजा कर रहे है । तो इस अवसर पर यहाँ उनको जनम दिन की बधाई प्रस्तूत करते हुए, उनके दो इन्टर्व्यू विडीयो और उनके दोनों के थोड़े से सम्पादीत श्राव्य रूप वाले इन्ट्रर्व्यू रख़े है, जिसमें पहेला पूनाकी मेरी अब तक़ की एक मात्र यात्रा के दौरान 22 दिसम्बर, 2012 ए दिन मेरे पूना निवासी मित्र श्री गिरीष मानकेश्वर के पूरे 10 घंटे के साथ सहकार के कारण हुआ था और जो उन्होंने ही शूट करके मूझे सीडी के रूपमें भेज़ा था जिसके लिये उनका तथा श्री डेनियेल्स साबह और उनके परिवार का भी आभारी हूँ । यहाँ मैं स्पस्ट करना चाहता हूँ, कि पूना वाले इन्टर्व्यू के दौरान हम लोग के कई रेडियो सिलोन प्रेमी मित्र वहाँ मूझे और डेनियेल्स साहब से मिलने आये थे जिनके नाम आउअ उन विडियोमें मेरे द्वारा सुन पायेंगे ही पर अफ़सोस है, कि उन दौरान गिरीष जी बोलने के पात्र होते हुए भी अपने आपको आवाझी और दृष्य दोनों रूप से केमेरे के सामने आये ही नहीं और निश्वार्थ रूपसे मददगार ही रहे, और थोड़ा सा सामूहीक बातचीत का स्वरूप होने के कारण जो बात उस दिन मेरे दिमागमें होते हुए भी निकल गयी थी, वह मैनें अन्य एक नेट पर स्काईप विडीयो कोलिंग द्वारा रेकोर्ड की थी जिसमें भी तक़निकी क्षती आने के कारण मेरे सुरत के मित्र जयेश पटेलने उसको हो सके इतना संवारने की एक मित्र भावसे ही कोशीश की और मूझे खूषी है, कि थोड़ी सी होठो की और आवझ की मिलावट मेरे बोलनेमें कहीं आपको कहीं कहीं ही सही, नहीं मिलेगी पर आपको हम दोनों के विचार जानने के लिये कोई दिक्कत नहीं आयेगी  ।
तोयह है पहेला पूना वाला इन्टर्व्यू (जिसमें उंन्होंने पियानो भी बजाया है)  : 



अब उपर वाले विडीयोमें  शामिल श्री एनोक डेनियेल्स साहब की बजाई पियानो (इलेक्ट्रोनिक) पर फ़िल्मी धूने सुनिये जो उन्हों ने मेरे सुचन करने पर बजाई थी ।

अब इस विडीयो का थोड़ा सा ही सम्पादित ओडियो सुने :

और यह है दूसरा विडीयो जिसमें उनके इंस्ट्रूमेन्टल रेकोर्ड्झ के नये प्रयोग और फिल्म झनक झनक पायल बाजे के स्टिरीयो कन्वर्झन  के बारेमें बातें की है ।

और नीचे अब उसका ऑडियो सुनिये :

और यहाँ आज रेडियो श्रीलंका से पद्दमिनी परेराजी ने उनको मेरे सहीत कुछ श्रोताओं और अपनी तरफ़ से प्रस्तूत की हुई बधाई  के साथ कुछ धूनों का गुल्दस्ता यहाँ प्रस्तूत है, जो रेडियो सिलोन ग्लोबल लिस्नर्स गृप के दिल्ही के हाल सिम्ला स्थित श्री अश्वनीकूमारजी के सौजन्य से है ।


पियुष महेता ।
सुरत-395001.
(सम्पर्क: 0261-2462789-09429859536 और 09898076606)







मंगलवार, 28 जून 2011

रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा नेट पर अभियंता दल की मर्ज़ी अनुसार

आदरणीय पाठक गण,

आज इस मंच पर यह मेरी पहली पोस्ट है । आज तक़ रेडियोनामा पर मैं लिख़ता चला आया हूँ । पर अब वहाँ रेडियो प्रसारण से सक्रीय रूप से जूड़े लोगो की सक्रीयता बढ़ी है वह एक रूप से अच्छी बात तो है ही, पर इस कारण उन लोगो की पोस्ट को तीन चार दिन प्रथम पन्ने पर रहेने देने के एक तरफ़ तक़नीकी दल आग्रही है तो दूसरी तरफ़ हम जैसे लोग इस मर्यादा का पालन करते है और इस पश्चात ही अपनी पोस्ट रख़ते है तो इस प्रकार के दूसरी या तीसरी कोटी के पोस्ट लेख़को को यह सहूलीयत नहीं मिलती है और किसी व्यक्ती विषेष के जनम दिन या मृत्यू दिन पर (यह ख़ास तौर पर अनसंग हीरोझ की बात है) तो तक़नीकी दल हमारे लिये बनाये नियमो का आग्रह रख़ता है तो मूश्कील होती है । तो इस लिये इस मंच का बनाना जरूरी माना है । अगर रेडियोनामा का तकनीकी दल इस मंच को अपना हिस्सा मान कर लिन्क रेडियोनामा से जोडना पसंद करता है तो खूशी की बात है । एक और बात की रेडियोनामा दल मेरी लिख़ाईमें मात्रा की गलतियोँ पर ज्यादा ध्यान देता है और कंटेन्ट्स पर थोडा कम, और वे अपनी जगह सही भी है । पर यह एक मेरी मर्यादा समझो, कि कभी मेरी इस विषय के ज्ञानमें कमी के कारण या कभी समय अभाव के कारण जल्दबाजीमें या कभी थक़ान के कारण जल्दबाजीमें मेरे लिये इस विषयमें सम्पूर्ण सही रहना मूमकीन नहीं हो पाता है । इस लिये वाचक क्षमा दे । इतनी बात कह कर मूल विषय पर आ जाता हूँ, कि रेडियो सिलोन यानि रेडियो श्रीलंका की सुबह की हिन्दी सेवा सत्तावार रूपसे तो नेट पर ओन लाईन प्रसारित होनी है, पर कभी देरी से या कभी बिलकूल नहीं या कभी शुरू हो कर बंद हो जाना या कभी प्लेयर का अपने आप रूक कर फ़िरसे प्ले करना पड़ना यह रोज़ की बात बन गई है, जब की रेडियो सिलोन की अन्य भाषाओं के नेट प्रसारण में इस प्रकार कोई रूकावट बार बार नहीं होती और 25 मीटर या 41 मीटर को भी डिजीटल रेडियो पर ट्यून करके पहेले से रख़ते है तो कभी बहोत ही धीमी आवाझ फूल वोल्यूम पर मिलती है या कभी बिलकूल नहीं मिलती है, जो यकायक 6 से 6.20 बजे के बीचमें इस तरह सही रूप से शुरू हो जाती है, जैसे ट्रांस्मीटर देरी से ही ऑन किया गया हो, और इन दोनों सेवा के लिये ओल इन्डीया रेडियो के ट्रांस्मीसन एघ्झीक़्यूटीव की तरह मोनीटरींग नहीं होता है और श्रोता लोग के फोन कोल्स पर ही उद्द्घोषिकाएँ कार्यवाही करवाती है । तो यह सब हिन्दी प्रसारण में ही क्यो ? यह तो श्रीलंका ब्रोडकास्टींग कोर्पोरेशन की जगह वहाँ तक सिर्फ़ श्रीलंका स्तूडियो कोर्पोरेशन हो जाता है । और अमरिका जैसे श्री लंका से शॉर्ट वेव प्रसारण की मर्यादा बाहर के देश के हिन्दी भाषी श्रोता नेट पर अप्राप्यता के हाल में कैसे बेहाल होगे !