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3 अक्तूबर, 1957 से विविध भारती के स्थापना दिनसे ही रेडियो सुनने की शुरूआत । ८ साल की उम्रसे ।

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

रेडियो श्रीलंका के भूतपूर्व उद्दघोषक और मेरे मित्र श्री रिपूसूदन कूमार ऐलावादी को देख़ीये और सुनिये उनके जनम दिन पर बधाई के साथ

रेडियोनामा में एक लम्बे समय पहेले प्रस्तूत एक रिपूसूदन कूमारजी की एक मूलाकात आज उनके जनम दिन पर इस ब्लोग पर फ़िरसे प्रस्तूत है । साथमें आज मेरे द्वारा रेडियो श्रीलंका पर भेजे गये बधाई संदेश को श्रीमती नलिनी मालिका परेरा की आवाझमें ।

मेरी मुम्बई यात्रा दौरान दि. २८-०२-२००८ के दिन पारसी जनरल अस्पतालमें स्व. केरसी मिस्त्री से अन्तीम मुलाकात की और दि. २९-०२-२००८ के दिन श्री गोपाल शर्माजी द्वारा परिचयमें आये रेडियो श्री लंका के भूतपूर्व उद्दघोषक श्री रिपूसूदन कूमार ऐलावादीजी से समय ले कर उनके यहाँ दो पहर १२-३० पर पहोँचा तब वे बहोत उष्मा से मेरा स्वागत किया । कुछः इधर उधर की बात कर के मैनें उनसे मेरी उनके साथ हुई बात चीत को अपने केमेरे में कैदै करने की बात कही तो वे सहमत हो गये । उस समय उनके धर पर हम दोनों के सिवा तीसरा कोोई नहीं था । इस लिये मैनें एक बिन कुशल विडीयो ग्राफर और इन्टर्व्यूअर की दो जिम्मेवारी निभाई । इस लिये मोनिटरिंग के कारण मेरे सर का उपला हिस्सा दृष्यांकनमें दिखता नहीं है और शुरूआतमें प्रकाश थोडी़ कम है । एक और बात, कि फोर्मेट परिवर्तनमें भी गुणवत्ता नुकसान थोडा़ होता है ।
तो देखि़ये दो हिस्सोमें
भाग 1

भाग 2



अब नीचे सुनिये रेडियो प्रसारण का वो अंश, जिसमें आज श्री रिपूसूदनजी को रेडियो श्रीलंका की हिन्दी सेवा की उद्दघोषिका श्रीमती नलिनी मालिका परेराने मेरे द्वारा भेजे गये संदेश के साथ बधाई दी जिसमें बादमें दिल्ही के दर्शन सिंह द्वारा भेजा गया संदेश भी प्रसारित हुआ जो यहाँ साथ जोड़ा गया है ।



पियुष महेता
सुरत

6 टिप्‍पणियां:

  1. सर , इस बातचित में मेरे पसंदीदा उद्घोषक दलवीर सिंह परमार जी का भी जिक्र आया है , मे भी बिलासपुर छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखता हूँ पर कभी उनसे मिलाने का सौभाग्य नहीं मिला , कृपा होगी अगर कभी उनके बारे मे कुछ लिखेगे या बतायेगे, सादर

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    1. श्री गोपाल शर्माजी, श्री दलवीर सिंह परमार श्री मनोहर महाजनजी के साथ ही रेडियो श्रीलंका 1867में जोईन हुए थे । और उनकी प्रस्तूती भी हलके फूलके मूड वाली होती थी । पर आज के निज़ी एफ एम की तरह नहीं । और मनोहर महाजन 1971 के बाद भारत में मुम्बईमें स्थायी हुए । पर दलवीर सिंहजी तो वहाँ ही रहे और उनके कई सालों के बाद भारत आये और मुम्बई राज कपूर साहब की राम तेरी गंगा मैली में चोटा सा किरदार भी निभाया था । पर बादमें वे फ़िरसे श्रीलंका रेडियो से बोलने लगे थे और उस बक्त ही उन्होंनें राम तेरी गंगा मैली वाली बात कही थी जो मैनें सुनी थी । और आज की रेडियो श्रीलंका की एक मात्र स्थायी उद्दघोषिका श्रीमती ज्योति परमार उनकी सुपुत्री है, जो वहाँ ही पली बढी है । पर फ़िर हर हमेश सब के बारेमें है, यकायक उनकी आवाझ रेडियो से गुन्जनी बंद हो गई, और लम्बे समय के बाद पता चला की वे अब इस दुनियामें नहीं है, और ऐसा भी सुननेमें आया है कि मधूमेह के कारण गेन्ग्रीन की वजह से एक पैर गवांना पड़ा था ।

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  2. आदरणीय मेहता जी , सादर प्रणाम उत्तर देने की लिए बहुत बहुत आभार , जाने क्यों जिन आवाजों को हम बड़े चाव से सुनते है उनको समय बड़ी बेरहमी से भुला देता है , आज देवकी नंदन पांडेजी , अशोक बाजपाई जी , सुरजीत सेन इन्दुवाही , दलवीर सिंह परमार जी ,आदि आदि जाने कितनी ही आवाजे जो हमारे मस्तिस्क मे अबतक अपनी स्मृति बनाये हुए है उनका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है ,ऐसे मे आप का प्रयास बंदनीय है , बहुत याद आते है जब मनोहर महाजन साहब एक ही सांस में , इन्दोर से आनिल भंडारे ,कामथी से बाबू लाल चकोले , महोबा से पंडित मेवा लाल परदेशी , बिलासपुर से धरमदास बाधवानी , भाटापारा से बच्कामल ........ कहा करते थे.

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  3. उनको समय बड़ी बेरहमी से भुला देता है , आज देवकी नंदन पांडेजी , अशोक बाजपाई जी , सुरजीत सेन इन्दुवाही , दलवीर सिंह परमार जी ,आदि आदि जाने कितनी ही आवाजे जो हमारे मस्तिस्क मे अबतक अपनी स्मृति बनाये हुए है उनका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है ,ऐसे मे आप का प्रयास बंदनीय है , बहुत याद आते है जब मनोहर महाजन साहब एक ही सांस में , इन्दोर से आनिल भंडारे ,कामथी से बाबू लाल चकोले , महोबा से पंडित मेवा लाल परदेशी , बिलासपुर से धरमदास बाधवानी , भाटापारा से बच्कामल ........अदि आदि कहा करते थे.और रात को हमेशा जावा गीतों का कार्य क्रम "आप के अनुरोध पर"

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  4. सर , पोस्ट करते समय कुछ गलत हो गया है दोनों ही मेरी है कृपया दोनों को मिला कर पढाने की कृपा करे असुविधा के लिए छमा करे

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