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3 अक्तूबर, 1957 से विविध भारती के स्थापना दिनसे ही रेडियो सुनने की शुरूआत । ८ साल की उम्रसे ।

मंगलवार, 28 जून 2011

रेडियो श्रीलंका हिन्दी सेवा नेट पर अभियंता दल की मर्ज़ी अनुसार

आदरणीय पाठक गण,

आज इस मंच पर यह मेरी पहली पोस्ट है । आज तक़ रेडियोनामा पर मैं लिख़ता चला आया हूँ । पर अब वहाँ रेडियो प्रसारण से सक्रीय रूप से जूड़े लोगो की सक्रीयता बढ़ी है वह एक रूप से अच्छी बात तो है ही, पर इस कारण उन लोगो की पोस्ट को तीन चार दिन प्रथम पन्ने पर रहेने देने के एक तरफ़ तक़नीकी दल आग्रही है तो दूसरी तरफ़ हम जैसे लोग इस मर्यादा का पालन करते है और इस पश्चात ही अपनी पोस्ट रख़ते है तो इस प्रकार के दूसरी या तीसरी कोटी के पोस्ट लेख़को को यह सहूलीयत नहीं मिलती है और किसी व्यक्ती विषेष के जनम दिन या मृत्यू दिन पर (यह ख़ास तौर पर अनसंग हीरोझ की बात है) तो तक़नीकी दल हमारे लिये बनाये नियमो का आग्रह रख़ता है तो मूश्कील होती है । तो इस लिये इस मंच का बनाना जरूरी माना है । अगर रेडियोनामा का तकनीकी दल इस मंच को अपना हिस्सा मान कर लिन्क रेडियोनामा से जोडना पसंद करता है तो खूशी की बात है । एक और बात की रेडियोनामा दल मेरी लिख़ाईमें मात्रा की गलतियोँ पर ज्यादा ध्यान देता है और कंटेन्ट्स पर थोडा कम, और वे अपनी जगह सही भी है । पर यह एक मेरी मर्यादा समझो, कि कभी मेरी इस विषय के ज्ञानमें कमी के कारण या कभी समय अभाव के कारण जल्दबाजीमें या कभी थक़ान के कारण जल्दबाजीमें मेरे लिये इस विषयमें सम्पूर्ण सही रहना मूमकीन नहीं हो पाता है । इस लिये वाचक क्षमा दे । इतनी बात कह कर मूल विषय पर आ जाता हूँ, कि रेडियो सिलोन यानि रेडियो श्रीलंका की सुबह की हिन्दी सेवा सत्तावार रूपसे तो नेट पर ओन लाईन प्रसारित होनी है, पर कभी देरी से या कभी बिलकूल नहीं या कभी शुरू हो कर बंद हो जाना या कभी प्लेयर का अपने आप रूक कर फ़िरसे प्ले करना पड़ना यह रोज़ की बात बन गई है, जब की रेडियो सिलोन की अन्य भाषाओं के नेट प्रसारण में इस प्रकार कोई रूकावट बार बार नहीं होती और 25 मीटर या 41 मीटर को भी डिजीटल रेडियो पर ट्यून करके पहेले से रख़ते है तो कभी बहोत ही धीमी आवाझ फूल वोल्यूम पर मिलती है या कभी बिलकूल नहीं मिलती है, जो यकायक 6 से 6.20 बजे के बीचमें इस तरह सही रूप से शुरू हो जाती है, जैसे ट्रांस्मीटर देरी से ही ऑन किया गया हो, और इन दोनों सेवा के लिये ओल इन्डीया रेडियो के ट्रांस्मीसन एघ्झीक़्यूटीव की तरह मोनीटरींग नहीं होता है और श्रोता लोग के फोन कोल्स पर ही उद्द्घोषिकाएँ कार्यवाही करवाती है । तो यह सब हिन्दी प्रसारण में ही क्यो ? यह तो श्रीलंका ब्रोडकास्टींग कोर्पोरेशन की जगह वहाँ तक सिर्फ़ श्रीलंका स्तूडियो कोर्पोरेशन हो जाता है । और अमरिका जैसे श्री लंका से शॉर्ट वेव प्रसारण की मर्यादा बाहर के देश के हिन्दी भाषी श्रोता नेट पर अप्राप्यता के हाल में कैसे बेहाल होगे !

7 टिप्‍पणियां:

  1. पीयूष भाई आपको रेडियो विश्व ब्‍लॉग शुरु करने पर सबसे पहले बधाई। आपको रेडियोनामा पर लगातार पढ़ना सुखद लगता रहा। रेडियो की दुनिया की कई बातें जिन्‍हें मै तो नहीं जानता था, आपने अवगत कराई। उम्‍मीद है कि आप अपने ब्‍लॉग पर रेडियो जगत की अधिक से अधिक पुरानी व नई यादें हम पाठकों के लिए लेकर आएंगे। कुछ खास ऑडियो या वीडियो एवं फोटो भी इस ब्‍लॉग पर दिखाएं तो मजा आ जाएगा। नए ब्‍लॉग के लिए एक बार फिर दिल से शुभकामनाए। कमल शर्मा, मुंबई।

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  2. बहुत बहुत बधाई पियूष भाई,
    आपकी रेडियो से जुड़ी पोस्ट्स को हम रेडियोनामा पर जरूर दिखाना चाहेंगे और आपके ब्लॉग का लिन्क भी जरूर देंगे।

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  3. श्री कमल शर्माजी आपको पहली टिपणी के लिये घन्यवाद । और सागरभाई आप तो हमारे मित्र ही रहे है । और यह एक तरफ़ से रेडियोनामा अलग पडने की बात नहीं है पर साथ चलने की बात है । और रेडियोनामा के प्रति मेरा प्रेम रहेगा ही । क्यों कि किसी की नझरमें अगर मै6 कुछ हस्ती हूँ तो वह रेडियोनामा की वजह से ही । और इस के लिये आप सभी दल का आभारी हूँ और वहाँ जो भी लिख़ा जायेगा उसका पाठक और तिपणीकार भी रहूँगा ही । यानि रेडियोनामा बडा भाई है तो रेडियो विश्व छोटा भाई है । बस एक सभी की सहूलियत को देख़ते हुए यह प्रयास किया है और आप को अब भी मेरी मात्रा की गलतियोँ को दिख़ाने का अधिकार है और मित्र के नाते आप का फर्ज भी है तो निज़ी मेईल से मेरा ध्यान आकर्षित जरूर करेंगे वैसी प्रार्थना है ।
    पियुष महेता ।

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  4. पीयूष भाई श्रीलंका ब्राडकास्‍ि‍टंग कार्पोरेशन सुनने के आदी रहे हि‍न्‍दी भाषी श्रोता फि‍र से कुछ समय के लि‍ये ही सही रेडि‍यो सीलोन सुन पाने की बातें सुनकर सचमुच काफी खुश हुए थे...परन्‍तु अब बेहाल हैं, दुखी हैं, हमारे अंचल में अनेकानेक श्रोता अक्‍सर इन तकलीफों का जि‍क्र करते रहते हैं...आपने कारण से तो अवगत करवा दि‍या...सुधारने का उपाय क्‍या हो सकता है इसका भी जि‍क्र करें...लि‍खि‍त रूप में श्रोताओं से पत्र आदि‍ भि‍जवाने से क्‍या कुछ फर्क पडेगा..

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  5. श्री संज्ञा टंडनजी,
    आज हाल ऐसा है कि मेरे क्षेत्रमें मेरे आसपास किसीको इन दिनों रेडियो सिलोन सुननेकी बात अगर करते है तो ज्यादा तर बुझूर्गों का प्रतिभाव ऐसा होता है, कि क्या रेडियो सिलोन अब भी आ रहा है और जवाँ लोगो या बच्चों तो रेडियो माने एफ एम मोबाईलमें वैसा ही मानते है पर मेरी समझमें कई सालों से एक बात यह भी आई है कि जि सामने दिख़ाई या सुनाई पडता है वह ही सत्य नही6 है पर हिन्दी भाषी क्षेत्रों के अन्तराल ग्राम्य क्षेत्र आज भी रेडियो से और सिलोन से जूड़े रहे है और थोड़े लोगोने मेरा सम्पर्क भी किया है । पर एक तरफ़ जहाँ वहाँ की सभी उद्दघोषिकाएँ भारत के और जहाँ भी हिन्दी भाषा जानने वाले रहते है चाहे पाकिस्तान ही क्यों न हो, बहोत ही आदर से पेश आती है, वहाँ दूसरी तरफ़ सारे विश्वमें भारतीयों और हिन्दी भाषा को गिनतीमें नहीं लेने का चलन है, सिवाकी भारतीय बाझार । तो इस लिये रेडियो श्रीलंका के चॆयरमेन को सही और शिष्ट पर स्पस्ट भाषामें ई मेईल अन्ग्रेजीमें करें और ज्यादा से ज्यादा लोगो से करवायें और सीधा पूछे कि उन लोगो की जवाबदेही जैसा कुछ है या नहीं और उनके सामने शिक्षात्मक कारवाई करने के लिये भी अग्राही बने । ई मेईल आई डी है chairmen@slbc.lk और इस बारेमें इन्दौर के श्री कैलाश शुक्ल आप को मूझसे भी अधिक जानकारी दे सकते है । उनका ई मेईल आई डी है kailash shukla" , और एक बात ध्यान जरूर रख़ें कि, कोई भी एस एल बी सी को नया उच्च शक्ति ट्रांसमीटर देने की श्रोता संध की तरफ़ से बात करें तो उन्हें नझरंदाझ करें और पूछे कि इसके बाद भी तकनीकी लोग इसी प्रकार चले तो क्या । और समयावधी 5.55 से 8 या 8.15 के बजाय 6.55 से 9 या 9.15 तक रख़ने का अग्राह रख़ें और हो सके तो अहोबन कार्यक्रम के प्रायोजक को सुचीत करें कि उनका कार्यक्रम हम तक पहोंचता नहीं तो वे 8 के बाद का समय एस एल बी सी से मांगे और इस संदेश को ज्याद से ज्यादा लोगो तक मेईल से प्रचारीत करें । घन्यवाद ।
    पियुष महेता ।
    सुरत-395001.

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  6. Dear Piyushbhai,
    Hearty congrats for the blog. We would certainly hope to know many more things thr' ur blog.

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